नई दिल्ली।कॉलेजियम के कुछ फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही है,आत्म-मंथन का आह्वान करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा है कि जिससे अवांछित उम्मीदवारों के लिए न्यायपालिका में प्रवेश करने और असंवैधानिक टिप्पणियां करने की गुंजाइश बनी है।
जस्टिस भुइयां ने पूछा, “मैंने देखा है कि कॉलेजियम के पिछले तीन फैसलों में कोई कारण नहीं बताया गया है। क्या यह पारदर्शिता के सिद्धांत से पीछे हटने जैसा कदम है?” जस्टिस भुइयां ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के फैसलों के साथ पहले कुछ कारण बताए जाते थे भले ही वे पूरी तरह से विस्तृत न हों।
‘जजों ने किस तरह के फैसले सुनाए, ये नागरिकों को जानने का अधिकार’
जज ने कहा, “कुछ लोग तो यह भी कह सकते हैं कि वे कुछ हद तक एक ही ढर्रे पर बने या कॉपी-पेस्ट जैसे थे लेकिन कम से कम उन सुझावों को सही ठहराने के लिए कुछ कारण तो बताए गए थे। जैसा कि हमने देखा है, प्लेटो से लेकर बेंथम तक नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि अदालतों में क्या हो रहा है। उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके जज कौन हैं। उन्हें यह जानने का अधिकार है कि जज ने किस तरह के फैसले सुनाए हैं। यह सब सार्वजनिक जानकारी में होना चाहिए।”

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